खुद गले लगा ली मौत, पर्यटक को नहीं आने दी खरोंच
मुनीष दीक्षित बैजनाथ। बिलिंग टेक ऑफ साइट में हुए पैराग्लाइडिंग हादसे में पायलट ने खुद मौत को गले लगा लिया। लेकिन साथ में उड़ान भरने वाले पर्यटक को खरोंच तक नहीं आने दी। शुक्रवार दोपहर बाद हुए इस हादसे में पैराग्लाइडर पायलट मोहन सिंह की मौत हो गई थी। घटना के बाद बेशक कई सवाल लोगों ने उठाए हों, लेकिन मोहन सिंह पैराग्लाइडिंग में कोई नया नाम नहीं था। करीब 15 साल से मोहन बीड़ बिलिंग में पैराग्लाइडिंग कर रहा था। टेंडम पैराग्लाइडिंग का उसे खास अनुभव था। इससे पहले भी मनाली में भी पैराग्लाइडिंग कर चुका था। शुक्रवार दोपहर बाद जब मोहन सिंह ने पश्चिम बंगाल कोलकाता के एक पर्यटक पार्थ दवे के साथ टेंडम पैराग्लाइडिंग की उड़ान भरना शुरू की। उस समय बिलिंग में हवा की स्थिति अधिक उपयुक्त नहीं थी। मोहन सिंह ने काफी इंतजार किया। इसी बीच उड़ान के लिए हवा का अच्छा झौंका मिला, कुछ पायलटो ने उड़ान भर दी। मोहन सिंह बिलिंग की मुख्य टेक ऑफ साइट में शुरू में ही सड़क के करीब से उड़ान भर रहा था। जैसे ही उसने पर्यटक के साथ उड़ान के लिए दौड़ना शुरू किया। अचानक हवा बिल्कुल अनुकूल हो गई और ग्लाइडर टेक ऑफ करते समय ही नीचे गिरने लगा। मोहन ने सबसे पहले अपने साथ दौड़ रहे पर्यटक को सुरक्षा प्रदान कर उसे रोका। इस दौरान मोहन जमीन पर गिरा और ग्लाइडर को रोका। इस दौरान उसके चेहरे में गंभीर चोट आ गई। जबकि उसके साथ उड़ रहा पर्यटक बिल्कुल सुरक्षित रहा। मोहन को एंबुलेंस में विवेकानंद हॉस्पिटल ले जाया गया। लेकिन बैजनाथ पपरोला में लगे भारी ट्रैफिक जाम में एंबुलेंस फंसने और बिलिंग से बैजनाथ का लंबा सफर होने के कारण के कारण मोहन को बचाया नहीं जा सका।

सैकड़ो पायलटो ने गांव में जाकर दी श्रद्धांजलि
मोहन सिंह मूल रूप से बरोट के साथ लगते लच्छयाण, बरधान का रहने वाला था। उसने बीड़ के क्योर में कुछ समय पहले ही घर बनाया है। करीब 35 साल के मोहन की पत्नी और दो छोटे बच्चे बरधान में ही रहते हैं। इसका एक भाई भी पैराग्लाइडिंग करता है। शनिवार को उसका अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव किया गया। बीड़ बिलिंग में उक्त पायलट को श्रद्धांजलि देने के लिए शनिवार को पैराग्लाइडिंग पूरी तरह बंद रही और सैकड़ो पायलटों ने उसके गांव जाकर अपने दोस्त को अंतिम विदाई दी।
मोहन सिंह बहुत शांत पायलट था। टेंडम उड़ानों की शुरुआत हम दोनों ने इकट्ठी की थी। काफी अनुभवी था। बीड़ बिलिंग ने एक अच्छा पैराग्लाइडर पायलट खो दिया। -राजकुमार, पैराग्लाइडर पायलट बीड़
मोहन सिंह खुद इस दुनिया में नहीं रहा। लेकिन उसने पर्यटक को कुछ नहीं होने दिया। मोहन पैराग्लाइडिंग प्री वर्ल्ड कप में भी भाग ले चुका था। काफी अनुभवी पायलट था। इस घटना में किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं थी। पायलट ने खुद को जोखिम में डालकर पर्यटक को बचाया है।– रणविजय सुपरवाइजर पर्यटन विभाग बीड़।
(खबर साभार : दैनिक जागरण)

