Kangra Valley Railway : सर्पीली राह पर टाय ट्रेन का सफर
मुनीष दीक्षित : आसमान में उड़ते मानव परिंदे, शक्तिपीठों से गूंजती घंटियों की स्वरलहरियां, महाराणा प्रताप सागर यानी पौंग झील में विदेशी पक्षियों की चहचहाहट, कांगड़ा चाय के बागान और विशाल धौलाधार पर्वत श्रृंखला को अगर आप नजदीक से देखना चाहते हैं, तो आपके लिए पहाड़ी ढलानों पर सर्पीली राहों में दौड़ती कांगड़ा घाटी टाय ट्रेन से बढ़िया विकल्प कुछ नहीं हो सकता। पठानकोट से जोगेंद्रनगर के बीच 164 किलोमीटर का यह सफर इतना खूबसूरत है कि आप ट्रेन में बैठे बैठे ही पूरी कांगड़ा घाटी का दीदार कर सकते हैं। अगर आप भी हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा या धर्मशाला घूमने आने का कार्यक्रम बना रहे हैं तो कांगड़ा घाटी ट्रेन का सफर भी जरूर करें। यह सफर पठानकोट से शुरू होता है। हालांकि आजकल पठानकोट के समीप चक्की पुल टूटने के कारण पठानकोट से जोगेंद्रनगर के लिए सीधी ट्रेन नहीं आ रही। लेकिन पठानकोट से कुछ किलोमीटर की दूरी पर नूरपुर रोड (जसूर) रेलवे स्टेशन से आप जोगेंद्रनगर के बीच का सफर कर सकते हैं। नूरपुर रोड से मैदानी इलाकों को छोड़ते हुए यह ट्रेन पहाड़ों की तरफ बढ़ती है।
इस सफर में आपके दाएं तरफ व्यास नदी पर निर्मित पौंग बांध से बनी विशाल महाराणा प्रताप सागर झील देखने को मिलती है। जहां विदेशी पक्षियों की चहचहाहट को आप काफी नजदीक से देख सकते हैं। सफर बढ़ते बढ़ते ऐतिहासिक नगरी हरिपुर गुलेर से कांगड़ा की तरफ बढ़ता है। गुलेर महान साहित्यकार चन्द्र शर्मा गुलेरी का पैतृक गांव है। इस सफर में ज्वालामुखी रोड से आप मां ज्वालामुखी व मां बगलामुखी के दर्शनों के लिए भी जा सकते हैं। इससे आगे आप बज्रेश्वरी देवी मंदिर कांगड़ा और चामुंडा मंदिर स्टेशन से इन शक्तिपीठों और सिद्ध पीठों के दर्शन भी कर सकते हैं।बाईँ तरफ धौलाधार के विशाल पहाड़ और चीड़ के घने जंगलों से यह सफर अब प्राकृतिक नजारों को बढ़ाते चला जाता है। कांगड़ा के निकट दो सुरंगों के बीच से यह ट्रेन गुजरती है। चाय नगरी पालमपुर से जैसे ही यह ट्रेन बैजनाथ पपरोला की तरह बढ़ती है, तो कांगड़ा चाय की खुशबू आपको आकर्षित करती है। पंचरुखी रेलवे स्टेशन इस पढ़ाव में एक ऐसा स्टेशन है, जहां से आप आर्ट गैलरी अंदरेटा जा सकते हैं। जहां प्रसिद्ध चित्रकार सरदार सोभा सिंह की आर्ट गैलरी आकर्षण का केंद्र है।
इस सफर में सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन बैजनाथ पपरोला है। जिसे हाल ही में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित किया गया। बैजनाथ पपरोला से पठानकोट के बीच चलने वाली ट्रेनों में 5 से 7 डिब्बे होते हैं। जिसमें करीब 300 लोग सफर कर सकते हैं। बैजनाथ पपरोला से जोगेंद्रनगर के बीच सबसे रोचक सफर शुरू होता है। यहां से रेल इंजन अधिक ऊंचाई होने के कारण तीन डिब्बे खींच कर ले जाता है। इस सफर में बैजनाथ शिव मंदिर के चरणों से गुजरते हुए चीड़ के घने जंगलों से निकलते हुए ट्रेन पहुंचती है इस रेलवे ट्रैक के सबसे ऊंचा 1290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रेलवे स्टेशन ऐहजू में। जहां से आप धौलाधार पर्वत श्रृंखला को भी नजदीक से देख पाते हैं, साथ पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध बीड़ बिलिंग घाटी से उड़ने मानव परिंदों का दीदार कर सकते हैं। ऐहजू से बीड़ का सफर केवल 5 किलोमीटर का है। इसके बाद ट्रेन पहुंचती है अपने आखिरी पड़ाव जोगेंद्रनगर में। यह जिला मंडी में आता है। यहां से आप बस से टैक्सी के माध्यम से मंडी या बरोट वैली जा सकते हैं। जोगेंदरनगर वह स्थान है जहां पर शानन पावर हाउस है, इसके निर्माण के लिए इस रेलवे ट्रैक को बनाया गया था।

3 साल में बना था यह रेलवे ट्रैक
पठानकोट जोगेन्द्रनगर नेरोगेज गेज रेल ट्रैक का निर्माण ब्रिटिश सरकार के समय में कर्नल बीसी बैटी के प्रयासों से शानन पावर प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए हुआ था। 164 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग में 950 छोटे बड़े पुल, दो सुरंगे शामिल है। कई बड़ी-बड़ी पहाड़ियों को काटकर इस रेल मार्ग को बनाया गया था। इसी रेल मार्ग में कांगड़ा के समीप खूबसूरत आर्क ब्रिज भी है। इसका निर्माण 1926 में हुआ था और 1929 में यह रेल मार्ग बनकर तैयार हुआ था। उस समय इसकी लागत एक करोड़ 13 लाख रुपए आई थी।
अभी चल रही है यह ट्रेनें
इस रेल मार्ग में अभी बैजनाथ पपरोला से कांगड़ा के बीच दो-दो ट्रेनें अपडाउन चल रही हैं। जबकि बैजनाथ पपरोला से जोगेंद्ररनगर के बीच एक एक ट्रेन चल रही है। इन ट्रेनों का समय बदलता रहता है। ऐसे में आप ट्रेनों का समय रेलवे विभाग की वेबसाइट से ले सकते हैं।जनवरी 2026 तक चक्की पुल भी निर्मित हो जाएगा। इसके बाद एक बार फिर यह सफर पठानकोट के साथ जुड़ जाएगा और ट्रेनों की संख्या भी बढ़ जाएगी।
इन पर्यटक स्थलों तक पहुंच सकते हैं आप
इस ट्रेन के सफर में जोगेंद्रनगर और पठानकोट के बीच कुल 32 रेलवे स्टेशन आते हैं। इनमें मुख्य रूप से पठानकोट जंक्शन, ज्वालामुखी रोड, गुलेर, कांगड़ा मंदिर, चामुंडा मार्ग, बैजनाथ पपरोला, ऐहजू और जोगेंद्रनगर शामिल है। कांगड़ा मंदिर और चामुंडा मार्ग से आप कांगड़ा और धर्मशाला भी जा सकते हैं। ज्वालामुखी रोड में उतर कर आप बस या टैक्सी के माध्यम से ज्वालामुखी मंदिर और बगलामुखी मंदिर दर्शन कर सकते हैं। बैजनाथ पपरोला रेलवे स्टेशन से शिव मंदिर बैजनाथ आप जा सकते हैं। ऐहजू रेलवे स्टेशन से आप बीड़ बिलिंग जा सकते हैं।
किराया इतना कम की बचत भी और सुहाना सफर भी
इस रेल सफर का किराया काफी कम है। बैजनाथ पपरोला से पठानकोट का किराया 35 रुपये है। जबकि बैजनाथ पपरोला से कांगड़ा मंदिर और जोगेंद्रनगर तक आने वाले सभी रेलवे स्टेशनों तक का किराया केवल 10 रुपये है।
शिमला की तर्ज में यहां पर भी हमारा प्रयास रहेगा कि पर्यटकों के लिए अलग से कोई ट्रेन चलाई जाए। अभी जो ट्रेनें चल रही हैं उसमें बैठने की काफी अच्छी व्यवस्था बनाई गई है। पठानकोट तक का सफर जून के बाद शुरू हो जाएगा। -विवेक कुमार, डीआरएम रेलवे जम्मू मंडल।
खानपान की सुविधा
पठानकोट जोगिंदर नगर के बीच चलने वाली ट्रेन में खानपान की कोई सुविधा नहीं होती है। कुछ स्टेशनों में छोटी कैंटीन है। ऐसे में खान-पान के लिए आप खाना पैक कर लें जाएं। इसके अलावा इस मार्ग में आने वाले सभी रेलवे स्टेशनों के साथ लगते शहरों में अच्छे खान-पान की सुविधा है और रहने के लिए भी गेस्ट हाउस होमस्टे और होटल हैं।

