भूस्खलन से शिव मंदिर और हाईवे को खतरा
बैजनाथ शिव मंदिर में पानी का रिसाव भी बढ़ा
खतरे को देखते हुए हाइवे के एक हिस्से को किया गया बंद।
मुनीष दीक्षित, बैजनाथ।
ऐतिहासिक शिव मंदिर बैजनाथ के साथ लगती पहाड़ी लगातार अस्थिर होती जा रही है। बिनवा नदी के तेज बहाव, भारी बरसात और बैजनाथ में सड़कों के पानी के लिए उचित व्यवस्था न होने के कारण दो दशक बाद फिर से इस पहाड़ी से मलबा गिरने का काम शुरू हो गया है। इस कारण बैजनाथ शिव मंदिर के साथ-साथ पठानकोट मंडी नेशनल हाईवे के भी एक हिस्से को खतरा पैदा हो गया है। यहां पर पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए हैं। साथ ही बरसात में शिव मंदिर बैजनाथ के गर्भ गृह के पास पानी का भारी रिसाव भी शुरू हो गया है। बैजनाथ के मंडी रोड पर बनी फुटपाथ में सोमवार को कंपन महसूस की जा रही थी। इसी स्थान के नीचे ल्हासा भी गिरा है। ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने इस संबंध में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों को अवगत कराया। इसके बाद यहां पर एक हिस्से को ट्रैफिक के लिए बंद कर दिया है। इसी स्थान से कुछ मीटर की दूरी पर इसी पहाड़ी के ऊपर बैजनाथ शिव मंदिर भी है। इस पहाड़ी में अक्सर छोटे-छोटे ल्हासे गिरने का क्रम हर बरसात में चला रहता है। बैजनाथ शिव मंदिर का एक हिस्सा भी हलका हल्का एक तरफ को झुक रहा है। कुछ समय पहले मंदिर परिसर के अंदर एक छोटा मंदिर भी गिर चुका है। इसे भी भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा आज तक ठीक नहीं किया गया है।
पुरातत्व विभाग नहीं लेता कोई सुध, पार्क भी उजड़े

शिव मंदिर बैजनाथ भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन आता है, जो मंदिर की सुरक्षा और संरक्षण का जिम्मा संभालता है। जबकि मंदिर की व्यवस्था को एसडीएम के माध्यम से सरकारी ट्रस्ट देखता है। कुछ सालों से इस मंदिर की लगातार उपेक्षा की जा रही है। मंदिर में रास्तों को चौड़ा करने के लिए यहां के पार्कों को उजाड़ दिया गया। आज हालात यह है कि पार्क भी खराब हो गए हैं और जो नए रास्ते बने हैं वह भी टूट चुके हैं।
मंदिर में रिसाव को लेकर स्थानीय प्रशासन की तरफ से कई बार पुरातत्व विभाग को लिखा जा चुका है। मंदिर के समीप जिस पहाड़ी को खतरा है उसके लिए मंडी आईआईटी की टीम कुछ दिन पहले दौर कर चुकी है। नेशनल हाईवे के जिस स्थान को खतरा है उसे फिलहाल साइड से बंद किया गया है।
– संकल्प गौतम, एसडीएम बैजनाथ।
बैजनाथ शिव मंदिर की व्यवस्था को लेकर सरकार का ध्यान लाया गया है। यह मंदिर केंद्र के पुरातत्व विभाग के अधीन आता है। इस कारण स्थानीय स्तर पर यहां कुछ नहीं किया जा पा रहा है। मंदिर के पार्कों की खस्ता हालत और मंदिर के खतरे का मामला संबंधित मंत्रालय के समक्ष उठाया जाएगा।
– किशोरी लाल, विधायक बैजनाथ।
